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मुख्यमंत्री के बारे में

मुख्यमंत्री के बारे में

श्री विष्णु देव साय:

 

नाम

:

श्री विष्णु देव साय

पिता का नाम

:

श्री राम प्रसाद साय

जन्मतिथि

:

21 फरवरी 1964

जन्म स्थान

:

बगिया गांव, जशपुर, छत्तीसगढ़

शैक्षणिक योग्यता

:

लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल, कुनकुरी, जशपुर

जीवनसाथी

:

श्रीमती कौशल्या देवी

3 दिसंबर 2023 को विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के चौथे मुख्यमंत्री के रूप में 'राज्य की सत्ता संभाली। अनुसूचित जनजाति बहुल छत्तीसगढ़ को विष्णु देव साय के रूप में आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने से जनजातीय क्षेत्रों में हर्ष का संचार हुआ है। श्री साय के मुख्यमंत्री बनने से प्रदेश की पारंपरिक तथा सांस्कृतिक विरासत को नवीन आयाम मिलने की आशा है। सरकार के कामकाज में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग के कल्याण की भावना प्रतिध्वनित हो रही है। सुशासन की अवधारणा यही है कि सभी वर्गों विशेषकर वंचित तबकों को न्याय तथा सम्मान दिलाने की पहल की जाए। 

वर्ष 1999 से लेकर वर्ष 2019 तक सांसद विष्णु देव साय का साउथ एवेन्यू दिल्‍ली स्थित शासकीय आवास, जिस प्रकार सदैव मरीजों से भरा रहता था, उसे देखने के बाद श्री साय के राजनीतिक अभिभावक माने जाने वाले स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी ने उनके दिल्‍ली स्थित आवास को 'मिनी एम्स' का नाम दिया था।
उत्तर के पहाड़ी जिले जशपुर में  मैनी नदी के किनारे बसे बगिया गांव के मुखिया (गौंटिया ) परिवार की तीसरी पीढ़ी में जन्मे विष्णु देव साय को समाज और समुदाय की सेवा के संस्कार पूर्वजों से विरासत में मिला है। नाम के अनुरूप विष्णु देव साय के स्वभाव में भी सौम्यता नजर आती थी। अपने विचारों और स्वभाविक गुणों के साथ विष्णु देव साय के अन्दर लोगों की सेवा करने 'की ललक हमेशा से ही रही। गांव में कहीं कोई 'घटना घटित हुई या कोई सामाजिक आयोजन होता, तो विष्णु देव साय उनमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे। यही कारण था कि महज 8 वर्ष की आयु पूरी करते ही वर्ष 1989 वह अपनी ग्राम पंचायत के पंच बन गए। इसके बाद निर्विरोध सरपंच भी निर्वाचित हुए। फिर दो बार विधायक बने। इसके बाद श्री साय रायगढ़ लोक सभा क्षेत्र से लगातार चार बार सांसद व केन्द्रीय राज्यमंत्री बने और अब जशपुर जिले के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होकर छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री पद को सुशोभित कर रहे हैं।
वर्ष 1999 में सांसद बनने के बाद विष्णु देव साय का कार्य क्षेत्र बढ़ गया। उस वक्‍त समाज में गरीबी व्याप्त थी। गरीब लोग बड़ी बीमारियों के ईलाज का खर्च वहन नहीं कर पाते थे। तब विष्णु देव साय मरीजों के मसीहा बने और गम्भीर मरीजों के परिजन सांसद श्री विष्णु देव साय के पास ईलाज में सहयोग की उम्मीद लेकर पहुंचने लगे। श्री साय ने उसवक्‍त लोगों की सेवा को प्राथमिकता देते हुए. उनकी उम्मीदों को पूरा किया। कई आदिवासी परिवारों को उपचार में मदद कर लोगों की जान बचाई। इस दौरान लोगों की दशा व समाज में व्याप्त गरीबी उन्हें अंदर तक तकलीफ पहुँचाती थी। तब उन्होंने प्रण लिया कि उनके पास जो भी मरीज आएंगे, उनके ईलाज में हर सम्भव मदद करेंगे और ऐसे गम्भीर मरीजों के लिये अपने सरकारी बंगले का दरवाजा खोल दिया। मरीजों को रायपुर तथा दिल्‍ली अपने आवास में बुलाकर स्वयं से लेकर शासकीय खर्चे से उनका ईलाज कराना प्रारम्भ किया। यही नहीं, उन मरीजों को दिल्‍ली व रायपुर में 'ठहरने के लिये अपने बंगले में कमरा दिया, भोजन की व्यवस्था भी की, मरीजों को भर्ती कराने हॉस्पिटल भी लेकर गए। उनका यह निःस्वार्थ सेवा कार्य रुका नहीं, निरन्तर ही चलता रहा और आज पर्यन्त तक जारी है। श्री साय जब से सांसद बने, तब से लेकर आज तक हजारों मरीजों का स्वयं के खर्च से ईलाज करा चुके हैं।
वर्ष १999 से लेकर वर्ष 209 तक सांसद विष्णु देव साय का साउथ एवेन्यू दिल्‍ली स्थित शासकीय आवास, जिस प्रकार सदैव मरीजों से भरा रहता था, उसे देखने के बाद श्री साय के राजनीतिक अभिभावक माने जाने वाले स्वर्गीय  कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी ने उनके दिल्‍ली स्थित आवास को 'मिनी एम्स' का नाम दिया था। जब भी श्री साय के निवास में ठहरे मरीजों के परिजन दिल्‍ली स्थित कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी से मिलने उनके बंगले में जाते थे, तब वह उनसे भी कहते थे, कहां मिनी एम्स में रुके हो। वे विष्णु देव साय जी के इस सेवा कार्य की खूब सराहना करते थे। वे कहते थे, कि विष्णुदेव साय एक दिन बहुत आगे बढ़ेंगे, जो आज सही साबित हुआ। भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा रऔर 'जनकल्याण में सदा रुचि रखने वाले प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय भी सौम्य-शील और सेवाभावी हैं। परिवार के वरिष्ठजन सार्वजनिक जीवन में थे। जनकल्याण की भावना उन्हें अपने परिवार के हिस्से के रूप में मिली। उनके बड़े पिता जी स्वर्गीय नरसिंह प्रसाद साय वर्ष १975 से १977 तक केन्द्र सरकार द्वारा लागू आपातकाल के दौरान जेल में निरूद्ध (मीसाबंदी ) रहे। छोटी आयु में ही विष्णु देव साय से पिता स्वर्गीय राम प्रसाद साय का साया 'उठ गया। माता जसमनी देवी साय ने इनका 'लालन-पालन किया। माता के साथ मिलकर पारिवारिक जिम्मेदारियां भी संभाली, साथ ही परिवार की सार्वजनिक जीवन से जुड़ी विरासत को भी आगे बढ़ाया। 
विष्णु देव साय, किशोरावस्था में लोयला हायर सेकण्डरी स्कूल, कुनकुरी में शिक्षा हासिल करने दौरान ही अपनी जिम्मेदारियों के प्रति बेहद सजग रहे। श्री साय का शुरू से ही युवाओं से जुड़ाव रहा, जो आज भी उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखायी देता है। श्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं के हित में प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी 'तरह से पारदर्शी बनाने के साथ ही यह निर्णय लिया है कि जिस परीक्षा में अनियमितता हुई है, सरकार उसकी जांच करायेगी। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सानिध्य में विष्णु देव साय ने कार्य किया और राजनैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के गुर सीखे। श्री साय की कार्यशैली और दक्षता को देखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में इस्पात, श्रम, खान एवं रोजगार मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव वर्ष 2023 में सुशासन का संकल्प लेकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने श्री विष्णु देव साय के लम्बे राजनैतिक एवं प्रशासनिक अनुभव एवं उनकी कार्यदक्षता को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद की महती जिम्मेदारी सौंपी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'की गारंटियों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री श्री साय पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रहे है।

 

 

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